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Parking was to be built in Amrut in 2016, it is now being built with the money of smart city | 2016 में अम्रुत में जाे पार्किंग बननी थी, वाे अब बन रही है स्मार्ट सिटी के पैसे से

Himachal Pradesh
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शिमला31 मिनट पहले

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विकासनगर में इस जगह पार्किंग बनाने का काम शुरू हो गया है। यहां भी स्मार्ट सिटी का पैसा खर्च किया जा रहा है। - Dainik Bhaskar

विकासनगर में इस जगह पार्किंग बनाने का काम शुरू हो गया है। यहां भी स्मार्ट सिटी का पैसा खर्च किया जा रहा है।

स्मार्ट सिटी का पैसा कैसे कैसे बर्बाद किया जा रहा है, उसमें हर राेज नए नए कारनामे सामने आ रहे हैं। अब जाे विकासनगर में पार्किंग बननी है, उसे बिल्ड ऑपरेट ट्रांसफर, बीओटी आधार पर नहीं, बल्कि स्मार्ट सिटी के पैसे से बनाया जा रहा है। पांच मंजिला मल्टी स्टोरी पार्किंग के इस प्रोजेक्ट पर करीब 13 करोड़ रुपए खर्च होंगे, जाे स्मार्ट सिटी से दिए जाएंगे। जबकि स्मार्ट सिटी का पैसा दूसरे काम के लिए आया हुआ है, जबकि विकासनगर की इस पार्किंग के लिए इसे खर्च नहीं किया जा सकता है।

ऐसे में सवाल उठ रहे है कि किसके कहने पर ये काम किया जा रहा है। इसमें 250 वाहनों को पार्क करने की सुविधा जरूर मिलेगी, लेकिन पैसा स्मार्ट सिटी का लगेगा। इसके अलावा पार्किंग भवन में कामर्शियल कांप्लेक्स और सामुदायिक केंद्र भी बनने हैं। पांच मंजिला मल्टी स्टोरी पार्किंग के इस प्रोजेक्ट पर कराेड़ाें रुपए खर्च होंगे। वहीं, नगर निगम अपनी पीठ थपथपा रहा है कि हमने पार्किंग का काम शुरू कर दिया है, लेकिन इस काम के लिए स्मार्ट सिटी के पैसाें काे बर्बाद कर दिया गया है।

पांच साल पहले भी किया था शिलान्यास
विकासनगर में जिस जगह पर यह पार्किंग प्रस्तावित की है, वहां पहले भी साल 2016 में एमसी ने पार्किंग बनाने की योजना बनाई थी। पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह ने इसका शिलान्यास किया था। बाकायदा टेंडर अवार्ड हो चुका था, लेकिन ठेकेदार ने काम शुरू नहीं किया। आखिरकार निगम को यह टेंडर रद्द करना पड़ा था। अब स्मार्ट सिटी के पैसों से यहां पार्किंग बनाई जा रही है। हालांकि, इसका भी पहला टेंडर आवेदन न मिलने से रद्द हो चुका है। अब फिर से टेंडर लगाए गए और पार्किंग निर्माण का टेंडर अवॉर्ड भी कर दिया गया है। ऐसे में यहां पर काम भी अब शुरू कर दिया गया है।

पार्किंग ताे बन रही, लेकिन पैसा स्मार्ट सिटी का लग रहा
स्थानीय लाेगाें की माने ताे पार्किंग बनने से राहत ताे मिलेगी, लेकिन स्मार्ट सिटी का जाे पैसा दूसरे काम में लगना चाहिए, वह पार्किंग में क्याें लगाया जा रहा है। अम्रुत याेजना के तहत पार्किंग का निर्माण क्याें नहीं किया गया। पार्किंग बनने के बाद इसे फिर से लीज पर दे दिया जाएगा। जिससे स्थानीय लाेगाें से वाहनाें काे पार्क करने के पैसे ले लिए जाएंगे। पार्किंग बनना ताे ठीक है, लेकिन पैसा गलत तरीके से इसमें यूज किया जा रहा है।

यही है राजनेता, अफसरशाही और ठेकेदार का गठजोड़
पूर्व मेयर… पूर्व मेयर संजय चाैहान का कहना हे कि शिमला के विकासनगर में पार्किंग का काम 2016 में एक कंपनी के द्वारा बीओटी आधार पर शुरु कर दिया था। एग्रीमेंट के अनुसार इन्हें ही इस पर पैसा खर्च करना था। इसका करार भी जिस प्रकार से लिफ्ट, छोटा शिमला व संजौली में बीओटी आधार पर पार्किंग बनाई गई है, उसी तरह से यह भी 30 साल की लीज पर है और उसके पश्चात यह नगर निगम शिमला की संपत्ति होगी। अब ठेकेदार को फायदा देने के लिए स्मार्ट सिटी के पैसे से इस पार्किंग का निर्माण करवाया जा रहा है। जो कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के दायरे में नहीं आता है। इस तरह से सरेआम पैसाें की बर्बादी की जा रही है।

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