The leopard who was killed in Kanlog 3 months ago, the forest department has not even been able to take the forensic report of that girl. | जिस बच्ची काे 3 महीने पहले कनलोग में मार गया था तेंदुआ, उस बच्ची की फॉरेंसिक रिपाेर्ट भी नहीं ले पाया है वन विभाग

Himachal Pradesh
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शिमला20 मिनट पहले

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तेंदुए शहर में जगह-जगह देखा जा रहे हैं, इससे लोगों में डर बना हुआ है। - Dainik Bhaskar

तेंदुए शहर में जगह-जगह देखा जा रहे हैं, इससे लोगों में डर बना हुआ है।

  • शहर में कई जगह दिख रहे तेंदुए लेकिन वन विभाग की टीम को ही नहीं मिल पा रहे हैं

तेंदुए शहर में जगह-जगह देखा जा रहे हैं। तेंदुआ तीन माह पहले कनलाेग से बच्ची, जबकि दाे सप्ताह डाउनडेल से छह वर्षीय बच्चे काे उठाकर ले जा चुका है, मगर वन विभाग अभी तक उस तेंदुए काे पकड़ नहीं पाया है। यही नहीं तीन माह पहले जिस बच्ची काे तेंदुए ने उठाया था, उसी बच्ची की फॉरेंसिक रिपाेर्ट तक वन विभाग नहीं ले पाया है। क्याेंकि यदि बच्ची की फॉरेंसिक रिपाेर्ट विभाग के पास हाेती ताे अब तक वह तेंदुए काे या ताे मार चुके हाेते या फिर पकड़ चुके हाेते और दिवाली की रात डाउनडेल से बच्चे काे उठाने वाला हादसा नहीं हाेता।

फॉरेंसिक रिपाेर्ट में स्थिति साफ थी की बच्ची काे तेंदुए ने बुरी तरह नाेच डाला था। मगर अभी भी विभाग की लापरवाही जारी है क्याेंकि ना ताे वन विभाग तेंदुए काे पकड़ पा रहा है और ना ही मार पाया है। बीते एक सप्ताह में शहर के अलग-अलग एरिया में तेंदुए देखे जा चुके हैं, केवल वन विभाग ही है जिसे तेंदुआ नहीं मिल रहा है।

देहरादून से आई टीम भी खाली
चार दिन पहले शहर में तेंदुए काे पकड़ने और उसकी लाेकेशन ट्रेस करने के लिए देहरादून की टीम भी शिमला आई है। मगर चार दिनाें से टीम के हाथ भी खाली है। केवल जंगलाें में भटकने के सिवाए टीम के हाथाें में कुछ नहीं लगा है। हालांकि दाे दिन पहले मादा तेंदुआ अपने तीन शावकाें के साथ रामनगर के साथ जंगल में रात काे ट्रेस हुई थी।
मगर उसके बाद अब ना ताे टीम के हाथ कुछ लगा है और ना ही टीम उसकी लाेकेशन पकड़ पाई है। जबकि एक साथ इतने तेंदुए के हाेने से पकड़ने में काफी आसानी है। मगर ऐसी लग रहा है कि अब विभाग फिर से तीन माह पहले कनलाेग हादसे की तरह इस मामले काे भी दबाने की तैयारी में है।

इन एरिया में है ज्यादा खतरा
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वन विभाग की लापरवाही इस कदर है कि शहर के साथ लगते जंगलाें में फैंसिंग तक नहीं की गई है। शहर के ज्यादातर इलाके जिसमें डाउनडेल, कनलाेग, नवबहार, मल्याणा, पंथाघाटी, टुटू, ढैंडा, समरहिल आदि एरिया ऐसे हैं जाे जंगलाें के साथ सटे हैं। यहां पर अकसर तेंदुए देखे जाते हैं। इन एरिया में हजाराें की संख्या में आबादी रहती है। रात के समय लाेग जंगलाें से हाेकर अपने घराें के लिए निकलते हैं। मगर ना ताे इसके लिए निगम संवेदनशील है और ना ही वन विभाग।

कनलाेग के लाेग कई बार मिल चुके हैं प्रशासन से
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कनलाेग क्षेत्र के लाेग कई बार तेंदुए की समस्या काे लेकर नगर निगम प्रशासन और वन विभाग से मिलकर उस एरिया के साथ लगते जंगलाें में साेलर फैंंसिंग करने की मांग उठा चुके हैं। सामाजिक कार्यकर्ता सुभाष वर्मा ने कहा कि कुछ समय पहले उनके कुत्ते काे तेंदुए ने रात काे उठाने का प्रयास किया था ताे उस समय भी क्षेत्र के लाेगाें ने साथ लगते जंगलाें में साेलर फैंंसिंग की मांग उठाई थी। मगर ना ताे वन विभाग ने सुनवाई की ना ही एमसी ने। इसे लेकर नागरिक सभा भी प्रदर्शन कर फैंंसिंग, कैमरों व स्ट्रीट लाइटों की उचित व्यवस्था की मांग उठा चुकी है। मगर आज तक कुछ ही हुआ। क्षेत्र में शाम और रात के समय लोगों में तेंदुए का डर बैठ चुका है। बाहर निकलन में डर लगता है।

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