Vishaldeep, the coach of the Indian gymnastics team, was chosen as the best coach, said – the stadium shown by the mother gave rise and life partner | भारतीय जिम्नास्टिक टीम के कोच विशालदीप बेस्ट कोच चुने गए, बोले- मां के दिखाए स्टेडियम ने बुलंदी और जीवन संगिनी दी

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अम्बाला3 घंटे पहलेलेखक: सुनील बराड़

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अम्बाला | अवाॅर्ड लेकर आने के बाद पिता से आशीर्वाद लेते विशालदीप। - Dainik Bhaskar

अम्बाला | अवाॅर्ड लेकर आने के बाद पिता से आशीर्वाद लेते विशालदीप।

  • भास्कर खास } दिल्ली से बुधवार रात को कैंट के पक्की सराय में लौटे जिम्नास्टिक कोच ने साझा किए खुशी के पल

स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) की तरफ से भारतीय जिम्नास्टिक टीम के कोच विशालदीप को बेस्ट कोच का अवाॅर्ड बुधवार को नई दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में दिया गया है। विशालदीप अम्बाला कैंट में पक्की सराय के रहने वाले हैं। सम्मान मिलने के बाद वे देर रात को अपने घर पर लौटे।

सबसे पहले अपने पिता नेशनल फुटबॉल प्लेयर खेमचंद के पैर छुए और मां के उस पल को याद किया जिसकी बदौलत आज इस बुलंदी पर पहुंचे हैं। इसके बाद परिजनों के साथ उन्होंने खुशी के पल बिताए। कोच विशालदीप ने बताया कि 22 अक्टूबर 2021 को उन्हें भारतीय टीम का कोच नियुक्ति किया गया था। अब उन्हें बेस्ट कोच का अवाॅर्ड स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) की तरफ से केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने दिया है।

पिता फुटबाॅल, दोनों भाई व बहन जिम्नास्टिक के नेशनल प्लेयर रह चुके

मैं परिवार में सबसे छोटा था। पिता खेमचंद फुटबॉल के नेशनल प्लेयर रहे हैं। दूसरे प्लेयर उन्हें छोटे के नाम से जानते थे। मेरी मां स्व. राजकुमारी चाहती थी कि परिवार के सभी तीनों बेटे और एक बेटी बड़े होकर बड़े खिलाड़ी बनें। मां हमें बचपन में अपने साथ पैदल ही कैंट के वार हीरोज स्टेडियम में लेकर जाती थीं, जहां पर मैं अपने दो बड़े भाइयों व बहन के साथ में जिम्नास्टिक की तैयारी करने लगा।

मां के दिखाए गए स्टेडियम के रास्ते को मैं कभी नहीं भूल पाया। मेरे दोनों भाई व बहन जिम्नास्टिक के नेशनल प्लेयर बने। मेरे भाई मुझसे तब तक गुस्सा रहते थे जब तक मैं ठीक ढंग से जिम्नास्टिक नहीं करता था। मैंने हरियाणा की तरफ से 2015 तक जिम्मास्टिक खेला। 2014-15 को खेल विभाग हरियाणा की ओर से पुरुष वर्ग में बेस्ट प्लेयर का अवाॅर्ड मुझे पंचकूला में मिला।

महिला वर्ग में बेस्ट प्लेयर का अवाॅर्ड मेरी पत्नी मर्यादा को मिला। इसके बाद साल 2015 मेरी मर्यादा से शादी हुई। अब दाे बेटियां हैं। वे भी जिम्नास्ट बनना चाहती हैं। मैंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस अकादमी पटियाला से 2016 में कोचिंग का डिप्लोमा किया। डिप्लोमा पूरा होने के बाद स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) से जुड़ गया। साई ने मुझे एक कोच के तौर पर नियुक्ति दी।

साई में मेरे कोच के कार्यकाल में 2016 से 2020 तक 20 नेशनल व इंटरनेशनल प्लेयर बने। बाद में मुझे भारतीय जिम्मास्टिक टीम को कोच बनाया गया। हमारी भारतीय जिम्नास्टिक टीम साउथ सेंट्रल एशियन चैंपियनशिप ढाका में 22 से 26 अक्टूबर को खेलने गई तो 23 मेडल मिले।

मुझे कोच एन-सत्यन, बलबीर सिंह, सुभाष शर्मा, राजेंद्र पठानिया, नरेश कुमार, कपिल कौशिक व इंडियन टीम के चीफ कोच रहे गुरदयाल सिंह बावा का काफी सहयोग मिला। अब मेरी तमन्ना है कि अम्बाला के प्लेयर भारतीय जिम्मास्टिक टीम का प्रतिनिधित्व करे।
जैसा भारतीय जिम्नास्टिक टीम के कोच विशालदीप ने भास्कर को बताया

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