3.58 kms without giving alternate route. Long Ambala road closed due to forelaning construction, 3 thousand students and people of 7 villages upset | वैकल्पिक रास्ता दिए बिना 3.58 किमी. लंबे अम्बाला रोड को फोरलेनिंग निर्माण के चलते किया बंद, 3 हजार छात्र व 7 गांव के लोग परेशान

Haryana
0 0
Read Time:7 Minute, 54 Second


  • Hindi News
  • Local
  • Haryana
  • Ambala
  • Kaithal
  • 3.58 Kms Without Giving Alternate Route. Long Ambala Road Closed Due To Forelaning Construction, 3 Thousand Students And People Of 7 Villages Upset

कैथल15 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक
कैथल| शहर से अम्बाला रोड होकर पैदल डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज जाते विद्यार्थी। - Dainik Bhaskar

कैथल| शहर से अम्बाला रोड होकर पैदल डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज जाते विद्यार्थी।

  • छात्र-छात्राएं 5 मिनट के सफर को पैदल 45 मिनट में तय कर रहे } धूल मिट्टी से हो रहे प्रदूषण में सांस लेना भी मुश्किल

फोरलेन सड़क के बनाने के लिए कंस्ट्रक्शन एजेंसी ने वैकल्पिक रास्ता दिए बिना ही अम्बाला रोड को पूरी तरह से बंद कर दिया है। पिछले 2 माह से रोड बंद है। 3.58 किलोमीटर का छोटा टुकड़े होने के बावजूद ये रोड बहुत महत्वपूर्ण हैं। क्योंकि एक कॉलेज और एक यूनिवर्सिटी इसी रोड पर होने के कारण रोजाना करीब 3 हजार छात्र यहां से आते-जाते हैं।

छात्रों को 5 मिनट के एक साइड के सफर को पैदल तय करने में 45 मिनट चलना पड़ता है। उसके बाद ही वे कॉलेज व यूनिवर्सिटी पहुंचकर पढ़ाई कर पाते हैं। छात्रों को पढ़ाई के लिए मजबूरी में रोजाना यह सफर तय करना पड़ता है। इतना ही नहीं करीब 7 गांव इस रोड पर लगता हैं। इन गांवों के ग्रामीण भी परेशानी झेल रहे हैं। इन गांवों का शहर से संपर्क ही टूट गया है।

इन्हें अपने गांवों में आने-जाने के लिए या तो असुरक्षित व धूल मिट्टी वाले रास्ते को चुनना पड़ता है या फिर 15 से 20 किलोमीटर के चक्कर काटने पड़ते हैं। डाइवर्जन दिए जाने के बावजूद भारी वाहन आ जा नहीं सकते हैं। हलके वाहनों में भी दोपहिया वाहन ही आ जा सकते हैं। छोटी गाड़ी ले जाना भी सुरक्षित नहीं है।

बीआर अंबेडकर सरकारी कॉलेज व महर्षि बाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय में पढ़ाई के लिए रोजाना करीब 3 हजार छात्र आते-जाते हैं। इन्हें अम्बाला बाइपास चौकी से लेकर संस्थान तक पैदल ही चलना पड़ता है। करीब 2.50 से 3 किलोमीटर के रास्ते को ये छात्र पिछले 2 माह से पैदल ही नाप रहे हैं। अगले करीब 10 माह तक भी इन्हें ये रास्ता पैदल ही नापना है। कॉलेज में 4 से 5 घंटे ही पढ़ाई होती है। छात्रों को इसके लिए डेढ़ घंटा तो पैदल ही चलना पड़ता है।

जगदीशपुरा, कवारतन, उझाना, दयौरा, बलवंती जसवंती व क्योड़क इसी रोड से शहर से जुड़े हैं सबसे पहले जगदीशपुरा, कवारतन, उझाना, दयौरा, बलवंती, जसवंती व क्योड़क गांव इसी रोड से सीधे शहर से जुड़े हुए थे। इन सभी गांवों में करीब 1500 से 2500 के बीच आबादी है। वहीं अकेले क्योड़क में तो 25 से 30 हजार आबादी है। इनमें से कवारतन व उझाना के पास तो आने-जाने का यही सीधा और छोटा रास्ता है।

दूसरे रास्तों आने के लिए इन्हें 15 से 20 किलोमीटर का चक्कर काटना पड़ता है या फिर हलके वाहन से हिचकौले खाते हुए और जान- जोखिम में डालकर रोड़ों व धूल मिट्टी के बीच शहर पहुंचना पड़ता है।
होटलों का काम भी ठप
इस 3.58 किलोमीटर के टुकड़े पर कई छोटे बड़े होटल, 2 पैलेस और ढाबे भी चल रहे थे। लेकिन सड़क बंद होने के कारण इनका बिजनेस पूरी तरह से ठप हो गया है। पहले 2 साल कोविड के कारण तंगी झेल रहे थे और अब रोड बंद होने से घाटा हो रहा है।
पहले ही मुश्किल कम नहीं थी अब रास्ते ने बढ़ा दी : मंजू
गांव सांघन से आती हैं। पहले तो गांव से शहर तक आने में ही रोजाना मुश्किलें आती हैं। लेकिन असली परीक्षा तो अब शहर में आने के बाद कॉलेज पहुंचने में होती है। उन्हें अम्बाला चौकी से लेकर कॉलेज तक रोजाना 45 से 50 मिनट एक साइड पैदल चलना पड़ता है। सुबह घर से जल्दी निकलने के बाद भी कॉलेज पहुंचने में देर हो जाती है।
मंजू, छात्रा, राजकीय कॉलेज।

पहले बस व ऑटो मिल जाते थे अब नहीं मिलते: शिवानी
शहर से कॉलेज तक जाने के लिए पहले बस या ऑटो मिल जाते थे। लेकिन सड़क निर्माण कर बसें बंद हैं और ऑटो वाले भी नहीं जाते। शहर में अपने घर से लेकर कॉलेज तक रोजाना पैदल आना-जाना पड़ता है। इसमें कई घंटे बर्बाद हो जाते हैं। पहले छोटी सड़क साइड में तैयार करनी चाहिए थी, ताकि छात्रों व लोगों को परेशानी न उठानी पड़ती।
शिवानी, छात्रा, राजकीय कॉलेज।

रोड़ों व धूल मिट्टी में चलने में मुश्किल : अंकित
पूरे रास्ते पर रोड़े बिखरे पड़े हैं और मशीनों से काम भी चलता रहता है। ट्रकों व मशीनों की आवाजाही से इतनी धूल मिट्टी है कि सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है। रोजाना कॉलेज लग रहे हैं। अगर कोई सुरक्षित व छोटा रास्ता आने-जाने के लिए दे दिया जाए तो बेहतर होगा।

अंकित,छात्र , राजकीय कॉलेज

सवाल : सड़क निर्माण से पहले वैकल्पिक रास्ता क्यों नहीं बनाया गया? जवाब : छोटा प्रोजेक्ट है और एक साल से भी कम समय में तैयार हो जाएगा। इसके लिए 2 डायवर्जन मुख्य सड़कों के लिए दिए हैं। वहीं शिक्षण संस्थानों व ग्रामीणों के लिए हलकों वाहनों का डायवर्जन कंस्ट्रक्शन साइट के साथ-साथ दिया हुआ है। सवाल : कंस्ट्रक्शन साइट पर पैदल चलने का रास्ता भी नहीं दिया गया है ? जवाब : कंस्ट्रक्शन के कारण दिक्कतें आ रही हैं। ब्रिज पर इसी महीने में स्लैब डालने के लिए तेजी से काम किया जा रहा है। अगले माह तक ब्रिज पर से रास्ता खोल दिया जाएगा। तब तक आगे रास्ता भी तैयार किया जा रहा है। सवाल : और कितने समय तक झेलनी होगी परेशानी? जवाब : टेंडर में एजेंसी को एक साल तक समय दिया है। लेकिन लोगों की परेशानी को देखते हुए इसको 6 माह में ही पूरा करने का लक्ष्य है। फरवरी या मार्च 2022 तक आने जाने के हिसाब से रास्ता तैयार कर दिया जाएगा। फिनिशिंग का काम साथ-साथ चलता रहेगा।

खबरें और भी हैं…



Source link

Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *