Street lights were to be installed from MC budget, now without a proposal this work is also being done for 32 lakhs without smart city | एमसी बजट से लगनी थी स्ट्रीट लाइट्स, अब बिना प्रपाेजल यह काम भी स्मार्ट सिटी के 32 लाख से हाे रहा

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शिमला19 मिनट पहले

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शहर में स्ट्रीट लाइटें बार बार बदली जा रही हैं। - Dainik Bhaskar

शहर में स्ट्रीट लाइटें बार बार बदली जा रही हैं।

शहर में स्मार्ट सिटी में जाे काम हाेना था, वाे ताे नहीं हाे रहा है, लेकिन जाे काम दूसरे प्राेजेक्ट के तहत हाे रहे हैं, उसे स्मार्ट सिटी में डालकर पैसाें की बर्बादी की जा रही है। शहर में लगभग 32 लाख रुपए की लागत से जाे स्ट्रीट लाइटाें काे लगाया जा रहा है, उसमें भी स्मार्ट सिटी का पैसा लगाया जा रहा है। जबकि इसके लिए एमसी से भी बजट मिलता है और एडीबी से भी पैसा आता है। जबकि, स्मार्ट सिटी का पैसा दूसरे काम में लगना था। एडीबी की ओर से ब्यूटिफिकेशन प्रोजेक्ट के तहत मालरोड की खूबसूरती संवारने के लिए 33 करोड़ रुपए जारी किए थे।

इससे भी ब्यूटीफिकेशन का काम हुआ, लेकिन अब फिर से स्मार्ट सिटी का पैसा स्ट्रीट लाइटें और अन्य काम के लिए यूज किया जा रहा है। हालात ये है कि इस पर माकपा और शिमला नागरिक सभा बार बार प्रश्न चिन्ह खड़ा करते रही। यहां तक की विपक्षी पार्टी कांग्रेंस ने भी सवाल खड़े किए, लेकिन इसके बावजूद भी स्मार्ट सिटी के तहत पैसाें की बर्बादी काे नहीं राेका जा रहा है। पूर्व मेयर संजय चाैहान का कहना है कि लाइटाें काे ठीक करने का काम एमसी का हाेता है। एमसी इसके लिए बजट का प्रावधान करता है। जबकि, यहां स्मार्ट सिटी और एडीबी दाेनाें का पैसा बर्बाद हाे रहा है। बार बार पैसाें का दुरूपयाेग करना सही नहीं हैं।

एडीबी ने भी लगाई थी लाइटें और रेलिंग
एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने करोड़ों रुपये खर्च कर मालरोड को संवारने के लिए रेलिंग और स्ट्रीट लाइटें लगाई हैं। जबकि कुछ समय पहले रेलिंग पर लगाए गए लोहे के बॉल चोरी हाे गए थे। चौड़ा मैदान से लेकर छोटा शिमला तक लगी इस रेलिंग से दाे दर्जन के करीब गाेल्डन बाॅल चाेरी हुए। इसके बाद अब स्मार्ट सिटी का पैसा इसमें लगाने की प्रक्रिया चल रही है।
शहर की सभी सड़कों पर परंपरागत स्ट्रीट लाइटों के स्थान पर आकर्षक एलईडी लाइटें लगाने का वादा भी किया गया था। कहा गया था कि मालरोड की तर्ज पर आकर्षक स्ट्रीट लाइट पोल भी लगाए जाएंगे। जबकि, अभी शहर के कुछ वार्ड काे छाेड़कर अन्य में अभी तक काम शुरू नहीं हुआ है। ये सारा काम शिमला ब्यूटीफिकेशन प्रोजेक्ट के तहत हाेना था। जबकि, अब इसे स्मार्ट सिटी में डाल दिया गया है।

अभी तक यहां यहां स्ट्रीट लाइटें लगाईं
अभी भराड़ी, कच्चीघाटी, भट्ठाकुफर, सांगटी, मल्याणा, पंथाघाटी वार्ड में नई लाइटें लगाई जा रही हैं। भराड़ी वार्ड के लक्कड़ बाजार एरिया में होटल वाइट के समीप नई स्ट्रीट लाइट लगने का काम हाे रहा है। कच्चीघाटी वार्ड में खराब पड़ी लाइटें भी दुरुस्त होंगी। भट्ठाकुफर वार्ड में नई लाइटें लगेंगी, साथ ही खराब लाइटें भी दुरुस्त होंगी। सांगटी में हाउसिंग बोर्ड कालोनी एरिया में नई लाइटें लगाई जाएंगी। मल्याणा में भी लाइटें लगने जा रही हैं। इसी वार्ड में मैहली से मल्याणा बायपास रोड पर भी लाइटें लगेंगी। लंबे समय से इस हाइवे पर स्ट्रीट लाइटें लगाने की मांग हो रही थी। ये लाइटें अब स्मार्ट सिटी के पैसाें से लग रही है।

बिजली का बिल भी देता है एमसी और मरम्मत भी करता है
मौजूदा समय में निगम सालाना लगभग 1.50 करोड़ रुपए तक का बिजली बिल विद्युत विभाग को चुका रहा है। इसमें निगम का 12.74 लाख रुपए का बिल स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत में लग रहा है। ऐसे में जाे स्ट्रीट लाइटें बार बार बदली जा रही है और इसके लिए अलग अलग फंड से पैसे खर्च हाे रहे, उस पर सवाल उठ रहे हैं। शहर के कुछ क्षेत्रों में जंगल के रास्तों में जंगली जानवरों का भी खतरा रहता है। ऐसे में ऐसी जगहाें पर लाइटें नहीं लगाई लाती है, जबकि जहां पहले लाइटें लगी हैं, वहां पर दाेबारा से लगाने का काम किया जा रहा है।

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