Those who lost their loved ones now also have hope for justice, the condition of the families of the farmers who lost their lives in the movement is going through a critical phase. | जिन्होंने अपनों को खोया अब उन्हें भी जागी न्याय की उम्मीद,आंदोलन में जान गवां चुके किसानों के परिवारों की हालत नाजुक दौर से गुजर रही

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राेहतक2 घंटे पहले

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मकड़ौली टाेल पर तीन कृषि कानूनाें काे लेकर बैठक करते हुए किसान नेता। - Dainik Bhaskar

मकड़ौली टाेल पर तीन कृषि कानूनाें काे लेकर बैठक करते हुए किसान नेता।

  • दैनिक भास्कर ने उन परिवारों का जाना दर्द

किसान आंदोलन में जान गवां चुके किसान परिवारों की हालत काफी नाजुक दौर से गुजर रही है। हालांकि, प्रधानमंत्री ने कृषि कानूनाें का वापसी का ऐलान कर दिया, लेकिन आंदाेलन में अपनी जान की आहुति देने वालाें के परिवाराें काे अभी आस है कि उनके लिए भी काेई फैसला है।

संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से उन्हें मदद और न्याय दिलाने का आश्वासन दिया है, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई सुध नहीं ली गई है। अब कानून वापसी के फैसले के बाद फिर उम्मीद जगी है कि उन्हें भी न्याय मिलेगा। दैनिक भास्कर उन परिवारों तक पहुंचा, जिन्होंने अपने परिजनों को खो दिया है। अब आजीविका तक के लिए परेशान होना पड़ा रहा है।

रिटायरमेंट के बाद अभी तक नहीं मिली राशि, बेटा करेगा खेती

पिछले साल 26 दिसंबर काे किसान आंदोलन में शामिल हुए गांव जिंदराण निवासी सतबीर की इलाज के दाैरान माैत हाे गई थी। इनके परिवार में फिलहाल कमाने वाला कोई नहीं है। बड़ा बेटा शमशेर पढ़ाई छोड़कर खेती-बाड़ी संभाल रहा है। दूसरा बेटा जितेंद्र भिवानी में सेनेटरी हार्डवेयर की दुकान चलाता है। तीन बहनों की जिम्मेदारी अब इन्हीं के कंधों पर आ गई है। सरकार की तरफ से अभी कोई आर्थिक मदद भी नहीं मिली है। ना ही सरकार के किसी प्रतिनिधि ने हाल जानने की कोशिश की है। मृतक सतबीर राठी की पत्नी सुरेश देवी भी पति की मौत के बाद से सदमे में और काफी दिनों से बीमार से चल रही है। इस हादसे ने उन्हें और भी भावुक कर दिया है।

सुरेश देवी का कहना है कि पति के जाने के बाद उनके दोनों बेटों पर घर की जिम्मेदारी आ गई है। बैंक का लोन था, उसे क्लियर कर चुके हैं। अब प्रशासन से भी आर्थिक मदद की गुहार व परिवार में एक नौकरी की मांग की है, ताकि परिवार का पालन पोषण अच्छे से हो सके। मृतक सतबीर राठी करीबन 3 वर्ष पहले शुगर मिल से रिटायर्ड हुए थे। रिटायरमेंट के बाद एकमुश्त राशि मिलनी थी, लेकिन वह भी अभी तक कोर्ट केस के चलते नहीं मिल पाई है। ऐसे में परिवार का पालन-पोषण करने की चिंता सताने लगी है।

बैंक की किस्त चुकाने के लिए बेचना पड़ा ट्रैक्टर

महम| किसान आंदोलन के चलते दम तोड़ चुके भैणी सुरजन गांव निवासी 50 वर्षीय किसान बलवान के घर की हालत दयनीय हो चली है। घर की 2 एकड़ जमीन है, जिस पर खेती करने वाला अब कोई नहीं बचा। परिजनों ने बैंक की किस्त चुकाने के लिए ट्रैक्टर को बेच दिया है। मृतक की पत्नी बबीता का कहना है कि 13 दिसंबर को उसके पति मदीना टोल प्लाजा पर धरने पर बैठे थे। वहीं उनकी तबीयत खराब हो गई। शाम को घर आए तो कुछ देर बाद उन्होंने दम तोड़ दिया।

उसने बताया कि उस दौरान किसान संगठनों व अन्य लोगों ने आर्थिक सहायता देने का वादा किया था, लेकिन कई दिन गुजरने के बाद भी परिवार की सुध लेने कोई नहीं आया। वह खुद 10वीं पास है। पति के साथ ही खेती में हाथ बंटाती थी। मृतक के बेटे विकास व आशीष ने बताया कि घर में अब कोई कमाने वाला नहीं बचा। पिता खेती करते थे जो चल बसे। उन्होंने पिछले दिनों कच्चे मकान को पक्का बनाया था, जिस पर खिड़की दरवाजे भी नहीं लगे हैं। विकास बीए फाइनल में और आशीष बीए सेकेंड ईयर में पढ़ता है।

दुखद: बच्चों ने ताे पिता काे अभी अच्छे से देखे भी नहीं था

बैंसी गांव निवासी किसान दीपक के दो मासूम बच्चों के सिर से पिता का साया उठने के बाद परिवार की स्थिति अजीबोगरीब हो गई है। फरवरी में किसान दीपक टिकरी बॉर्डर पर खाद्य सामग्री लेकर ट्रैक्टर में जा रहा था। बहादुरगढ़ के पास ट्राली से गिरकर वह चोटिल हो गया था।

इलाज के दाैरान पीजीआई में दम तोड़ दिया था। मृतक दीपक के पिता राजेंद्र 10 साल पहले गुजर चुके हैं। घर में पत्नी बबली, दो मासूम बच्चे कार्तिक (5) नातिक (3) मां शीला व भाई नवीन रह रहकर दीपक को ढूंढ रहे हैं। मृतक की पत्नी 10वीं पास है। भाई की शादी नहीं हुई है। मां शीला ने बताया कि पुश्तैनी 3 एकड़ जमीन है। इसके अलावा ठेके पर जमीन लेकर दोनों भाई खेती-बाड़ी करते थे।

शहीद किसानों के परिवारों को आर्थिक मदद व नौकरी दे सरकार : पूर्व सीएम

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा ने तीन कृषि कानून वापस लिए जाने के फैसले को किसानों की जीत करार दिया है। उनका कहना है कि यह किसानों के लंबे संघर्ष और सत्याग्रह की जीत है। सरकार को अब किसान के बाकी बचे अन्य मुद्दों पर भी बातचीत करनी चाहिए। साथ ही कृषि को लाभकारी बनाने की योजनाएं बनानी चाहिए। हुड्डा ने कहा कि सरकार की तरफ से आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज किए गए सभी मुकदमे वापस लिए जाने चाहिए।

आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसान के परिवारों की मदद के लिए भी सरकार को आगे आना चाहिए। जिस तरह पंजाब की कांग्रेस सरकार ने पीड़ित परिवारों को आर्थिक मदद और सरकारी नौकरी दी है। उसी तर्ज पर हरियाणा सरकार को भी ऐलान करना चाहिए। कहा कि उन्होंने कांग्रेस विधायक दल की तरफ से शहीद किसानों के परिवारों को दो-दो लाख रुपए की आर्थिक मदद दी है।

किसानों पर दर्ज मुकदमे तुरंत वापस लें सरकार : दीपेंद्र

राज्यसभा सदस्य दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने संबंधी प्रधानमंत्री की घोषणा से स्पष्ट हो गया कि किसानों की मांगे जायज थीं। उन्होंने आंदोलन में अपनी जान की कुर्बानी देने वाले 700 से अधिक किसानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। दीपेंद्र हुड्डा ने मांग की कि सरकार दिवंगत किसानों के परिजनों को सरकारी नौकरी व आर्थिक सहयोग दें।

साथ ही किसानों पर दर्ज मुकदमे तुरंत वापस लें। वे कार्तिक पूर्णिमा पर शुक्रवार काे गांव हुमायूंपुर व बखेता में दादी पिलासन वार्षिक मेला कार्यक्रम में बाेल रहे थे। उन्हाेंने कहा कि सरकार को अविलम्ब किसानों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए। मंडियों में खरीद बंद करने से किसान को एमएसपी से कम भाव पर अपनी फसल बेचनी पड़ रही है।

कृषि कानूनों की वापसी भारत की असली जीत

प्रधानमंत्री की ओर से तीन कृषि कानूनों को वापस लिए जाने के बाद किसानों में खुशी का माहौल है। शुक्रवार को अनाज मंडी में किसानों ने एक दूसरे का मुंह मीठा कराया। फरमाणा गांव के सरपंच आशीष कुमार ने कहा कि पिछले एक साल से चल रहे किसानों के आंदोलन की वजह से ही तीनों नए कृषि कानून केंद्र सरकार ने वापस लिए हैं। यह भारत की असली जीत है। किसान कृष्ण व अंकुर सिवाच ने कहा कि बेवजह देशभर के 700 बेगुनाह किसानों की जान चली गई। सरकार की तानाशाही व पुलिस की लाठियां झेलनी पड़ी। उन्होंने कहा कि किसान फिलहाल धरने पर बैठे रहेंगे। संयुक्त किसान मोर्चा का हर फैसला उन्हें मान्य होगा।

एमएसपी पर गारंटी की मांग भी पूरी करे केंद्र सरकार: विधायक बत्तरा

कांग्रेस विधायक भारत भूषण बत्तरा ने कहा कि काले कृषि कानूनों का वापस होना किसानों के त्याग तपस्या और बलिदान की जीत है। आखिर अहंकार से भरी भाजपा सरकार को अपने काले कानून को वापस लेना ही पड़ा। विधायक भारत भूषण बत्तरा ने कहा कि किसानों के बलिदान के बाद जागी भाजपा सरकार ने भारी जनसमर्थन के दबाव में तीनों काले कानून वापस लेने का फैसला लिया है, यह किसानों की जीत है।

भले ही भाजपा ने कई राज्यों में प्रस्तावित चुनाव के मद्देनजर यह फैसला लिया हो, लेकिन यह अन्नदाता की जीत है। भाजपा सरकार को इसके साथ ही एमएसपी पर गारंटी सुनिश्चित करनी चाहिए। क्योंकि कहीं पर भी एमएसपी पर फसल की बिक्री नहीं हो रही है।

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