Local people have also suffered pain in a year of agitation, now United Kisan Morcha will honor on 26 November | आंदोलन के एक साल में स्थानीय लोगों ने भी झेला है दर्द, अब 26 नवंबर को सम्मानित करेगा संयुक्त किसान मोर्चा

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हरियाणा19 मिनट पहले

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कुंडली बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा के मंच से रूपरेखा बताते किसान। - Dainik Bhaskar

कुंडली बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा के मंच से रूपरेखा बताते किसान।

  • हरियाणा, पंजाब और यूपी के लोगों से संयुक्त मोर्चा का आह्वान- बड़ी संख्या में बॉर्डरों पर पहुंचें

किसान आंदोलन के दिल्ली की सीमाओं पर 26 नवंबर को एक साल पूरा होने पर बड़ा कार्यक्रम किया जाएगा। संयुक्त किसान मोर्चा का पूरा फोकस आंदोलन स्थल पर किसानों की संख्या बढ़ाना है। इसके लिए उन्होंने हरियाणा, यूपी और पंजाब के किसानों को काफिले के साथ बॉर्डर पर लौटने की अपील की है। वहीं, संयुक्त मोर्चा 26 नवंबर को शक्ति प्रदर्शन करने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए स्थानीय लोगों का भी सहयोग लिया गया है। किसान मोर्चा स्थानीय ग्रामीणों को भी आंदोलन स्थल पर बुलाकर सम्मानित करेगा।

मोर्चा का मानना है कि किसान आंदोलन के 1 साल के दौरान किसानों के साथ- साथ यहां के ग्रामीणों ने भी बड़ा दर्द झेला है। लोग परेशान हुए हैं, लेकिन उन्होंने किसानों का साथ नहीं छोड़ा। स्थानीय लोगों के साथ देने की वजह से ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी झुकना पड़ा है। सरकार तीन काले कानून वापस लेने पर मजबूर हुई है। संयुक्त किसान मोर्चा के प्रवक्ता हरेंद्र सिंह ने कहा कि 26 नवंबर को आंदोलन का एक साल पूरा हो रहा है। मोदी सरकार के खिलाफ किसान बड़ा प्रदर्शन करेंगे।

जगह-जगह पर किसानों के समर्थन में लोग मोदी सरकार के खिलाफ विरोध प्रकट करेंगे। हरियाणा व पंजाब के हर जिले में किसानों का भरपूर समर्थन मिलेगा। पहले की तरह किसान वाहनों के साथ बॉर्डर पर लौटेंगे। किसानों ने संकल्प लिया कि जब तक किसानों की सभी मांगें पूरी नहीं होती, आंदोलन चलता रहेगा। संयुक्त किसान मोर्चा का विश्वास है कि किसानों का यह आंदोलन शांतिपूर्ण रहते हुए ही जीता जा सकता था।

प्रधानमंत्री ने जिस प्रकार से तीन कानून वापस लेने का ऐलान किया है। इसका किसान स्वागत करते हैं और साथ ही प्रधानमंत्री से आग्रह करते हैं कि किसानों के साथ बातचीत का रास्ता खोला जाए। इससे जो मांग अभी अधूरी है, उस पर किसान चर्चा कर सके। किसान आंदोलन अब जीतने के कगार पर हैं। कुंडली बॉर्डर पर किसान बड़ी संख्या में पहुंचकर सरकार को चेतावनी देंगे कि जब तक किसानों की मांगें पूरी नहीं होती, तब तक किसान वापस नहीं जाएंगे।

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