The agency had to put 2 to 5 feet deep drinking water pipe, in many places put it only on half foot | एजेंसी को 2 से 5 फुट गहरे डालने थे पेयजल पाइप, कई जगह आधे फुट पर ही डाले

Haryana
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अम्बाला9 घंटे पहले

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सिटी की दशमेश काॅलोनी में अमरुत प्रोजेक्ट के तहत डाली पाइप लाइन सड़क के ऊपर ही पड़ी है। - Dainik Bhaskar

सिटी की दशमेश काॅलोनी में अमरुत प्रोजेक्ट के तहत डाली पाइप लाइन सड़क के ऊपर ही पड़ी है।

  • खुलासा – निगम के चीफ इंजीनियर की जांच में सामने आया- एजेंसी ने गलत तरीके से किया काम, लेकिन बिल पास हो चुके

अमरुत योजना के तहत सिटी के आउटर एरिया में डाली गई पेयजल पाइप लाइन में एजेंसी में जमकर गड़बड़ियां की। 2 से 5 फुट तक गहराई में पेजयल पाइप लाइन डालनी थी, लेकिन आधे फुट में ही डाल दी गई। यह खुलासा चीफ इंजीनियर की जांच में हुआ।

हालांकि निगम एजेंसी के 53 करोड़ के बिल पास कर चुका है, लेकिन एक साल से दो करोड़ के बिल की पेमेंट के साथ-साथ कंप्लीशन सर्टिफिकेट पर रोक लगा दी है।

अमरुत योजना के तहत सिटी में उन आउटर काॅलोनियों में पाइप लाइन डाली जानी थी जहां पेयजल की समस्या थी। 2018 में एजेंसी को वर्क ऑर्डर अर्बन लोकल बॉडीज (डायरेक्टर ऑफिस) ने दिया। इस पर काम नवंबर 2020 में खत्म होना था, लेकिन कोरोना काल के चलते एक साल काम करने का पीरियड बढ़ा दिया गया।

एजेंसी समय-समय पर बिल की पेमेंट लेती रही। पाइप लाइन डलने के बाद जब लोगों के घरों तक पानी नहीं पहुंचा तो खूब हल्ला हुआ। मामला फरवरी में निगम की बैठक में पार्षद टोनी चौधरी ने उठाया। इसके बाद निगम कमिश्नर ने बैठक में चीफ इंजीनियर को जांच की जिम्मेदारी सौंपी।

यहां की गई गड़बड़ियां

मंडौर में आधा किलोमीटर तक कोई काॅलोनी नहीं है। फिर भी वहां पर पेयजल पाइप लाइन डाल दी गई। जड़ौत रोड पर दशमेश काॅलोनी में पाइप लाइन डालने के बाद 6 इंच सीसी करनी थी, लेकिन दो से तीन इंच सीसी की। जिस कारण सीसी उखड़ गई। गुरु नानक काॅलोनी, आसा सिंह गार्डन, जग्गी गार्डन में डाली सीसी भी उखड़ गई।

कबीर नगर में तो गली में पाइप लाइन सड़क के ऊपर ही डाल दी गई। मेन ब्रांच लाइन चार फुट नीचे दबी है। इसलिए पानी घरों तक नहीं पहुंच रहा। बलदेव नगर एरिया में तो पुरानी पाइप लाइन के साथ नई पाइप लाइन जोड़ दी गई। जिस कारण पानी दूषित आ रहा है।

जांच में यह हुआ खुलासा

चीफ इंजीनियर महिपाल के अनुसार कुछ जगह जांच में सामने आया कि पाइप लाइन कुछ स्थानों पर बैठ गई है। पाइप लाइन 2 से 5 फुट गहराई तक डालनी चाहिए थी, लेकिन आधा फुट तक पाइप लाइन दबाई गई है। कबीर नगर में तो पाइप लाइन सड़क के ऊपर डाली गई है।

पाइल लाइन डालने में एजेंसी ने गड़बड़ी की है। इसलिए उसे कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं दिया गया। जब तक पूरी पाइप लाइन ओके करके नहीं दी जाती है, तब तक एजेंसी का बकाया बिल रोका गया है। 30 नवंबर तक एजेंसी की डेड लाइन है। एजेंसी पांच साल तक इन पाइप लाइन की टेकओवर करेगी।

7 नोटिस भेजे, कोई जवाब नहीं

लोगों की शिकायतें मिलने के बाद नगर निगम ने एजेंसी को सात नोटिस भेजे हैं, लेकिन एजेंसी ने नोटिस का जवाब नहीं दिया है, क्योंकि एजेंसी को पाइप लाइन बिछाने का काम यूएलबी से मिला हुआ है। इसलिए लोकल लेवल पर एजेंसी अधिकारियों की परवाह नहीं कर रही।

ऐसे हुई जांच गड़बड़ी की

फरवरी में जब नगर निगम की मीटिंग हुई तो उसमें यह मामला उठा था। फिर अगस्त में हुई मीटिंग में पार्षद ने मामला उठाया। मामले उठने के बाद कमिश्नर ने जांच चीफ इंजीनियर को सौंपी। जिन एरिया में पाइप लाइन डाली गई उन एरिया के पार्षदों को साथ लेकर जांच की। अभी उनकी जांच पूरी नहीं हुई। 17 नवंबर की मीटिंग में फिर इसका मामला उठा तो कमिश्नर धीरेंद्र खड़गटा ने इसके लिए जांच कमेटी बनाने का आश्वासन सदन को दिया।

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