Left his land and built a road on farmer’s land, if protested, the work of 200 meter pieces stuck | अपनी जमीन छोड़ किसान की जमीन पर बना दी सड़क, विरोध किया तो अटका 200 मीटर टुकड़े का काम

Haryana
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कैथलएक घंटा पहले

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कैथल-करनाल रोड पर कच्ची पड़ी विवादित जगह से निकलते वाहन चालक। - Dainik Bhaskar

कैथल-करनाल रोड पर कच्ची पड़ी विवादित जगह से निकलते वाहन चालक।

  • रोजाना हजारों वाहन चालक झेल रहे परेशानी, किसान का आरोप-परिवार में कोई पढ़ा लिखा नहीं, पीडब्ल्यूडी ने जमीन पर बिना मुआवजा दिए गलत तरीके से किया कब्जा
  • पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन बोले-ये वर्षों पुराना मामला है, विभाग की जमीन किसान के पास, मनाने के प्रयास भी किए, लेकिन वे कोर्ट चले गए

कैथल करनाल रोड पर पीडब्ल्यूडी बीएंडआर की एक गलती हजारों वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बन चुकी है। पीडब्ल्यूडी ने वर्षों पहले गांव मूंदड़ी क्षेत्र में अपनी जमीन को छोड़ किसान की जमीन पर सड़क बना दी। पहले सिंगल रोड होने से ज्यादा परेशानी नहीं थी और किसान को भी मालूम नहीं था। लेकिन अप्रैल 2019 में कैथल से करनाल तक शुरू हुए फोरलेनिंग के कार्य के दौरान जब किसान की कुछ और अतिरिक्त जमीन पर मिट्टी डालने का काम होने लगा तो किसान ने विरोध कर दिया।

विभाग नहीं माना तो किसान कोर्ट में चला गया। कोर्ट ने करीब ढाई वर्ष पूर्व जमीन पर स्टे दे दिया। स्टे के बाद से 200 मीटर रोड कच्ची पड़ी है। कैथल से करनाल तक 65 किलोमीटर की ये फोरलेन सड़क चकाचक है, लेकिन इस छोटे से टुकड़े के कारण यहां से गुजरने वाले हजारों वाहन चालकों को परेशानी झेलनी पड़ती है।

किसान का आरोप-विभाग ने किया जमीन पर कब्जा, इससे 3 हिस्सों में बंट गई उनकी जमीन

गांव मूूंदड़ी के किसान प्लेयर का कहना है कि न तो उनके पिता पढ़े लिखे थे और तीनों भाइयों में से भी कोई पढ़ा लिखा नहीं है। विभाग ने उसी का फायदा उठाया। उन्हें जो जानकारी है 1967 में सड़क निकली थी तो तब विभाग ने नजायज रूप से जमीन पर कब्जा कर लिया था। उसके बाद अब फोरलेनिंग के समय भी और अतिरिक्त जमीन पर मिट्टी डालना शुरू कर दिया। उन्होंने विरोध किया, लेकिन अधिकारी नहीं माने। गाली गलौज कर जबरदस्ती मिट्टी डाली तो उन्होंने पड़ताल की और बाद में कोर्ट में केस डाल दिया।

करीब ढाई वर्ष पहले कोर्ट ने इस पर स्टे कर दिया है। विभाग उनके साथ जबरदस्ती कर रहा है। न तो मुआवजा दे रहा है और न ही जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी कर रहा है। विभाग की गलतियों के कारण ही उनकी जमीन 3 हिस्सों में बंट चुकी है। उनकी जमीन सड़क के दोनों तरफ होने के साथ-साथ नहर के दूसरी तरफ भी है।

विभाग ने किसान के साथ जबरदस्ती की, इससे और बिगड़ा मामला

200 मीटर के इस टुकड़े के विवाद को विभाग को पहल कर सुलझाना चाहिए था। क्योंकि विभाग की गलती थी। इसको वर्तमान में में एक्सईएन और पूर्व एक्सईएन भी मान रहे हैं कि सड़क प्राइवेट प्राॅपर्टी पर बनी है। लेकिन उसके बावजूद किसान के साथ बैठकर और मुआवजा आदि देकर मामले को सुलझाने के प्रयास नहीं किए गए। किसान के अनुसार उन पर दबाव बनाया गया। गाली गलौज भी किया। इससे मामला और बिगड़ गया है। अब इस टुकड़े पर स्टे है और किसान विभाग को तारकोल तक नहीं डालने दे रहा है।

187 करोड़ से फोरलेनिंग का काम हो चुका पूरा

कैथल करनाल रोड पर 1 अप्रैल 2019 को फोरलेनिंग का काम शुरू हुआ था। 187 करोड़ रुपए से कैथल करनाल बाइपास से लेकर चिड़ाव मोड़ करनाल तक 49 किलोमीटर सड़क बनाई। इसमें ज्यादातर हिस्सा करनाल पीडब्ल्यूडी का था। कुछ माह पहले ये सड़क बनकर तैयार हो चुकी है और कुछ दिन पहले सीएम करनाल से ही इसका उद्घाटन भी कर चुके हैं। फोरलेनिंग से पहले 65 किलोमीटर के सफर को पूरा करने में करीब 2 घंटे का समय लगता था। अब ये घटकर आधा रह गया है और दुर्घटनाओं में भी कमी आई है।

ये उनके आने से पहले का मामला है। बहुत समय पहले किसान की जमीन पर सड़क बनी हुई थी है। किसान के पास भी विभाग की जमीन है। कई बार किसान को मनाने के प्रयास भी किए हैं। लेकिन वे नहीं माने और कोर्ट में चले गए। अब मामला कोर्ट में विचाराधीन है और जो भी फैसला आएगा वह मान्य होगा। वाहन चालकों की परेशानी को देखते हुए किसान से बातचीत कर मिट्टी डलवाई गई थी। लेकिन मिट्टी ज्यादा समय तक टिक नहीं पाती।-केसी पठानिया, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी बीएंडआर, कैथल।

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