MDU; Choudhary is equal for the first time in 43 years, both the claimants agree to the headship of 6-6 months, the decision today | एमडीयू; 43 साल में पहली बार बराबरी की चाैधर, दोनों दावेदार 6-6 माह की प्रधानी काे राजी, फैसला आज

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रोहतक13 घंटे पहले

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प्रधान पद के दोनों दावेदारों काे बराबर वाेट मिलने पर अगले दिन फैसला करने के लिए कहते हुए कुल सचिव डाॅ. गुलशन तनेजा। वहीं चुनाव अधिकारी प्रो. राहुल ऋषि ने कहा कि विवि के नियमों के अनुसार ही अब फैसला होगा। - Dainik Bhaskar

प्रधान पद के दोनों दावेदारों काे बराबर वाेट मिलने पर अगले दिन फैसला करने के लिए कहते हुए कुल सचिव डाॅ. गुलशन तनेजा। वहीं चुनाव अधिकारी प्रो. राहुल ऋषि ने कहा कि विवि के नियमों के अनुसार ही अब फैसला होगा।

  • प्रधान पद के चुनाव में सुमेर अहलावत और कुलवंत मलिक को 277-277 वोट मिले
  • जेडी ऑडिट का मुद्दा और जातीय समीकरण रहा चुनाव में हावी
  • उप-प्रधान पद के लिए सुमेर के पैनल से विकास गिल जीते, जबकि कुलवंत के खेमे से तीन पदाधिकारी जीतकर संघ में आए

एमडीयू (महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय) के इतिहास में पहली बार गैर शिक्षक कर्मचारी संघ के चुनाव में बड़ा रोचक मुकाबला देखने को मिला। विवि में वर्ष 1978 में बने गैर शिक्षक कर्मचारी संघ के चुनाव में 43 साल में पहली बार दो प्रत्याशियों को बराबरी की चौधर मिली है। सुमेर अहलावत और कुलवंत मलिक के बीच वोटों को लेकर टाई हो गया।

अब इसका फैसला विवि प्रशासन की ओर से बुधवार काे बैठक बुलाकर लिया जाएगा। दोनों प्रधान दावेदारों को 277-277 वोट मिले हैं। इनकी टर्म के ऊपर एक दिन के लिए फैसला सुरक्षित रखा गया है। दोनों दावेदारों का कहना है कि वे 6-6 महीने के लिए टर्म लेने को तैयार हैं। चुनाव विश्लेषकों का मानना है कि इस बार जेडी ऑडिट केे मुद्दे के साथ ही तय हो गया था कि चौधर किस ओर जाएगी। इसमें जातीय समीकरणों के साथ-साथ कर्मचारियों के छोटे-मोटे काम करवाने का आपसी व्यवहार भी जीत का कारण बना है।

कुलवंत तीन बार प्रधान रह चुके हैं और सुमेर एक बार प्रधानी संभाल चुके हैं। लेकिन इस बार विवि की स्वायतता को लेकर मुद्दा बड़ा नजर आ रहा था, जिसे लेकर कर्मचारियों ने इन दोनों नेताओं पर भरोसा किया। भास्कर ने चुनाव से एक दिन पहले ही समीकरण स्पष्ट कर दिया था कि इस बार किसी पैनल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलेगा।

मतगणना केंद्र से लाइव… वोटों की गिनती देखने को लेकर कई बार हुआ हंगामा
मतगणना हो रही थी तो केंद्र में सिर्फ सुमेर और कुलवंत ही थे। वोटों की गिनती देखने को लेकर कई बार हंगामा हुआ। इस दौरान कुलसचिव प्रो. गुलशन तनेजा ने माेर्चा संभाला और मतगणना खत्म होने के बाद ही वहां से निकले। वहीं उप-प्रधान पद पर सुमेर अहलावत के पैनल से विकास गिल जीते हैं, जबकि कुलवंत मलिक के पैनल से तीन पदाधिकारी जीतकर संघ में आए हैं।

महासचिव पद पर सुरेश कौशिक, सह-सचिव पद पर सुनील सैनी व कोषाध्यक्ष पद पर अजमेर सिंह चुने गए हैं। प्रधान पद के तीन अन्य उम्मीदवार फूल कुमार बोहत को 187, राजबाला सांगवान को 63 व राजेन्द्र यादव को 13 मत मिले हैं। यहां सहायक निर्वाचन अधिकारी उप कुलसचिव ज्ञान गिरधर, पीठासीन अधिकारी अधीक्षक खैराती लाल, राकेश जैन, सतीश जैन, सतबीर श्योराण, कांता, जयभगवान राणा व अजीत समेत अन्य अन्य कर्मी उपस्थित रहे।

सुरेश ने मारी महासचिव की हैट्रिक

सुरेश कौशिक को लगातार तीसरी बार महासचिव के पद की जिम्मेदारी मिली है। पहली बार 2018-19 में उन्हें 370 वोट मिले थे और इसके बाद 350 वाेट आए और अब 276 वाेट मिले हैं।

5वीं बार कोषाध्यक्ष बने अजमेर सिंह

ऐसा पहला मौका रहा, जब कोषाध्यक्ष के लिए लगातार पांचवीं बार अजमेर सिंह ने विजयश्री हासिल की है। अजमेर को इस बार 267 वोट मिले हैं। उनका कहना है कर्मचारियों के बीच रहकर उनके काम के लिए वे सदैव तैयार रहते हैं, इसलिए उन पर कर्मचारियों ने पांच बार भरोसा किया है। उनके भरोसे पर खरा उतरने का प्रयास करेंगे। साथियों की मांगों को पूरा कराने के लिए पूरी जिम्मेदारी से काम करने का प्रयास रहेगा। ​​​​​​​

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