Protest on the road of Sector 8 in Panchkula, side jam on one side of the road, Anganwadi worker accuses the government of flouting promises | पंचकूला में सेक्टर आठ की सड़क पर दिया धरना, सड़क की एक ओर साइड जाम, आंगनबाडी वर्कर ने सरकार पर लगाए वायदाखिलाफी के आरोप

Haryana
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आंगन बाडी़ वर्कर व हेल्पर यूनियन ने अपनी मांगों को लागू करवाने के लिये बुधवार पंचकूला सेक्टर आठ में सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। 49 दिन बीत जाने के बाद भी सरकार ने सुध नहीं ली तो वर्कर व हेल्पर ने सेक्टर 8 में सड़क पर रोष प्रदर्शन किया। इससे पहले शालीमार माल ग्रांउड पर हरियाणा प्रदेश से हजारों वर्कर व हेल्पर इकटठे होकर हाउसिंग बोर्ड चौक की ओर कूच किया। चंडीगढ़ मुख्यमंत्री के निवास पर कूच करने से पहले ही पुलिस ने चौंक पर आंगनबाडी व हेल्पर वर्कर को रोक लिया।

पंचकूला में प्रदर्शन करती आंगनबाड़ी वर्कर व हेल्पर।

सरकार ने जो जिम्मेदारी दी, उसे निभाया

आंगनबाड़ी वर्कर ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि 02 अक्तूबर 1975 को सरकार ने समेकित बाल विकास विभाग का गठन किया और इस नींव को मजबूत करते हुए आंगनवाड़ी का नाम दिया। इन महिलाओं ने 46 साल में सरकार ने जो भी जिम्मेवारी साैंपी,उसे बडे उत्साह से करके सरकार को दिखाया। गर्भवति महिलाओं व छोटे बच्चो, आप की बेटी हमारी बेटी के फार्म हड़ताल के कारण अधूरे पड़े हैं।सरकार वैसे तो महिलाओं का आदर करती है परंतु सरकार वर्कर व हैल्पर महिलाओं को महिला नहीं मानती। मांग पूरी तो दूर की बात बातचीत करने में भी गुरेज कर रही है। धरने के दौरान एक वर्कर व एक हेल्पर का निधन हो गया है। उनकी भी कोई सुनवाई नहीं हुई । सरकार प्रधान मंत्री मातृत्व वंदना योजना के तहत 2017में घोषणा हुई आज तक लागू नही हुए।

भीड़ दिखाने की दी जाती है जिम्मेदारी

वर्कर ने बताया कि अगर किसी वीआईपी या सीएम, पीएम को कहीं भीड दिखाना है तो गांव में से हर एक चार पांच साथ लाने को कहा जाता है। अगर किसी वर्कर व हेल्पर की मृत्यु हो जाए तो उसे कुछ भी नहीं दिया जाता, अधिकारी अपने चहेतो को सब कुछ दे रहे हैं ऐसी कई फाइल कार्यालय में लंबित है। कोरोना में वर्कर व हेल्पर की मौत हो गई है। किसी को भी कुछ नहीं मिला। अब सरकार कुशल व अर्ध कुशल मजदूर मानने से भी हाथ पीछे खींच रही है। एक महिला अपने चार सदस्यों के साथ 10000 या 5500 रूपये में कैसे गुजारा करें। जबकि महंगाई चरम सीमा पर है। इनके सामने सरकार से 2018 में सरकार से हुए समझौते को लागू करने की मांग कर रहे हैं। 30/35 वर्ष नौकरी के बाद भी न तो कोई पेंशन न ही कोई मानदेय सिर्फ एक कागज दमा दिया जाता है।



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