Tried to work keeping the respect of the government, then felt that the goal of life was to take VRS, now I will not even come to take the medal | सरकार की बात का मान रखते हुए काम करने की कोशिश की,फिर लगा जिंदगी का लक्ष्य कुछ इसलिए वीआरएस ली,अब मेडल लेने भी नहीं आऊंगी

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अम्बाला9 घंटे पहलेलेखक: रितिका एस. वोहरा

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भारती अरोड़ा - Dainik Bhaskar

भारती अरोड़ा

  • 1998बैच की आईपीएस अधिकारी अम्बाला की आईजी का वीआरएस का दूसरा आवेदन मंजूर, जुलाई में पहली बार किया आवेदन सरकार ने मंजूर नहीं किया था

अम्बाला रेंज की पुलिस महानिरीक्षक 1998 बैच की आईपीएस अधिकारी भारती अरोड़ा की स्वैच्छिक सेवानिवृति को सरकार ने मंजूरी दे दी है। वह 1 दिसंबर को दोपहर में रिलीव हा़े जाएंगी। वीआरएस मंजूरी के बाद भारती अरोड़ा बोलीं-‘पहले जुलाई में जब कृष्ण भक्ति मार्ग पर चलने के लिए वीआरएस मांगा था तो सरकार के आदेश थे कि अभी अपनी डयूटी करूं।

सरकार ने मुझे मान-सम्मान दिया, इसलिए उस समय आदेश का मान रखते हुए काम करने की कोशिश की। लेकिन मुझे महसूस हा़े रहा था कि मेरी जिंदगी का लक्ष्य कुछ और ही है, इसलिए दोबारा आवेदन किया। अब भक्ति मार्ग पर चलूंगी और पुलिस मैडल लेने भी वापस नहीं आऊंगी, क्योंकि भक्ति मार्ग पर वो सब मेरे लिए कोई महत्व नहीं रखता, उनका अब करूंगी क्या।’

उल्लेखनीय है कि सरकार की ओर से उन्हें पुलिस मैडल फाॅर मैरिटोरियस सर्विस देने की घोषणा हुई थी। भारती अरोड़ा ने कहा कि हम लोग हमेशा पद, प्रतिष्ठा और मान सम्मान में जीवन बिताते हैं। इनके पीछे भागकर मिलता कुछ नहीं है। सुख का असली स्रोत तो भगवान के चरणों से मिलता है। इसलिए श्री कृष्ण की शरण को ग्रहण करके आनंद की प्राप्ति करनी चाहिए।

नौकरी छोड़ने के बाद वृंदावन में आश्रम से जुड़कर भक्तिकाल के संतों के दिखाए मार्ग पर चलने की ठानी

  • नौकरी छोड़ने के बाद अब भक्ति मार्ग पर आगे क्या सोचा है?
  • अब वृंदावन में रहकर भक्तिकाल के संतों के दिखाए मार्ग पर चलूंगी। किसी आश्रम से जुड़कर नहीं बल्कि चैतन्य महाप्रभु के मार्ग पर चलने का प्रयास करूंगी।
  • आईपीएस बनने का सपना कब देखा और फिर भक्ति मार्ग पर जाने की कब सोची?
  • पिता वीके जाजोरिया 1967 के मध्यप्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी थे। उनकाे देख मैंने भी आईपीएस बनने का सपना देखा। मम्मी जयरानी जाजोरिया ने मुझे आईपीएस बनने के लिए प्रेरित किया। भक्ति मार्ग पर जाने की कहानी बड़ी लंबी है।
  • खुद को मां व पत्नी की भूमिका में कैसे देखती हैं?
  • (हंसकर कहती हैं) मैं ना ही अच्छी मां हूं और ना ही अच्छी पत्नी। मुझे लगता है मैंने कोई जिम्मेदारी अच्छे से नहीं निभाई। हमेशा करियर में रहते हुए सर्विस पर ध्यान दिया। हालांकि मेरे इस फैसले को बच्चाें व पति से 100 प्रतिशत सपोर्ट मिला है। बेटी गोपिका आईआईटी और बेटा माधव प्रोफेशनल कोर्स कर रहा है।
  • पुलिस सेवा के दौरान कोई यादगार केस रहा हो?
  • वैसे तो बहुत केस सुलझाए लेकिन 2004-2005 में लड़की के दुष्कर्म व हत्या का ब्लाइंड केस था। नहर में उस लड़की की लाश मिली थी और वो प्रेग्नेंट थी। डॉक्टर पोस्टमार्टम के दाैरान भ्रूण निकालना भूल गए। डॉक्टर से मैंने बात की तो मुझे पता चला डेडबॉडी कैथल के परिवार को साैंप दी गई थी। गाड़ी लेकर कैथल पहुंची। उस समय शव को चिता पर लेटाया जा चुका था। उसी समय शव से भ्रूण निकाला। शक के दायरे में आए युवकाें के डीएनए से मैच करवाया तो एक लड़के से डीएनए मिल गया। घटना स्थल पर गाड़ी के टायर के निशान व गाड़ी में मिले सीमंस के सैंपल भी उसी लड़के से मैच हुए और केस सुलझ गया।
  • नशे व पर्यावरण के लिए जो प्रोजेक्ट शुरू किए थे, उनका क्या होगा?
  • कल ही यमुनानगर के कलेसर में लगाए गए नशा मुक्ति के कैंप का समापन है। वहां जा रही हूं। साथ में तीनाें एसपी को भी लेकर जाऊंगी। निर्देश भी देखकर जाऊंगी कि यह सफर अब रूकना नहीं चाहिए जाे प्रयास शुरू किया है वो चलता रहे।

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